दिल बड़ा ही जज्बाती है
खुद से प्रेम करने का इजहार भी उनसे ही करता है
मैं झूठ बोल देता हूँ
जब भी गम में दिल भारी होता हैं
गम पे खबर लेने वाले पूछ लेते है
बताते–बताते आगे निकल आता हूं
मैं झूठ बोल देता हूँ
मेरा जिंदगी में सादगी बहुत हैं
जिंदगी में ठाट बाट भी अच्छा लगता है मुझे
पर सादगी पे मोहित लोग की वाह में
अक्सर झूठ बोल देता हूं
मुझे नाचना पसंद है
गाने का शौक उससे ज्यादा है
सुरीली बोल नहीं है
तो झूठ बोल देता हूं
कुछ मेरी कामयाबी पे मेरी प्रसंशा करते हैं
उसमे चार चाँद लगाने में झूठ बोल देता हु मैं
मेरी हार पे लोग मेरे साथ होते हैं
उन लोगो के सामने हार का मैं तिरस्कार करता हूँ
और फिर झूठ बोल देता हु मैं
हर पल हर भावना में मैं खुद को खोल देता हूं
फिर एक नया झूठ बोल देता हूं
मैं खुद के साथ बहुत सच्चा हूं
इस सच्चाई के अभियान में झूठ छुपा देता हूं
मैं अक्सर झूठ बोल देता हूं
समय और परिवेश अलग है
खून के रिश्ते आज बहुतो के कोसो दूर है
रिस्तेदारो की तरह मिलना होता है उनसे
फर्क सिर्फ उतना है की घर अपना होता है
तो फिक्र और फर्क दोनों देखने पड़ेंगे
रिश्ते हमे ढूंढने पड़ेंगे
पैसे हमे असीमित कर हिसाब छोड़ना होगा
हमे बाकि लोगो में दोस्त ढूंढा पड़ेगा
परिवार ढूंढना पड़ेगा
परिवार सा बे-हिसाब रहना पड़ेगा
अर्जित धन लूट जाये तो ग़म नहीं करो
अर्जित लोगो से अगर विचार और परिवेश मिल रहे है
तो उनपर खुद को लूटना पड़ेगा
यही होगा एक अच्छा जीवन
सार्थक जीवन की तलाश छोड़ दो
ये तलाश हमे खुद में अहम बनाती है
हमे खुद को बहुत आम और आसान बनाना होगा
जो सही लोगो का साथ कभी न छोड़े
गलत लोगो का साथ छोड़ने में न कतराए
जिंदगी में लोगो को आने जाने को रास्ता आसान रखना होगा
जीवन बस एक जीवन बन कर ही रहना होगा
इसी जीवन के लिए सही और गलत लोगो की पहचान देखना होगा
दोस्तों को परिवार ही समझना होगा
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब एक लड़की लड़के से प्यार का इजहार करती है
वो डाट कर अपनी सहेलियों को भगा देती है
और कहती है खबरदार जो हम दोनों के बीच में कोई आये
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब एक लड़का लड़की के प्यार में दीवाना हुआ होता है
वो कहता है की मेरी जिंदगी भी तुम और दीवानगी भी तुम
वो पांच रूपये के लिए दोस्तों पे बेरहमी दिखाता है
और लड़की पे हजारो खर्च कर रहम की मांग करता है
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब एक लड़का एक छोटी सी गलती पे भी
अपने प्यार से हजार बार माफी मांगता है
और हजार गलतियों पे भी साथियो को आँख दिखाता है
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब कोई गुस्से में पागल होकर सबको मार डालने की बात करता है
और प्यार के गुस्से को न झेल पाने पर आत्महत्या की बात करता है
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब पास बैठे प्यार को मनाने के लिए हजारो प्रयास करता है
और वही पास बैठे दुखी साथी को खुश होने का ज्ञान देता है
मैं दलित सा महसूस करता हु
जब कोई हर लड़की को फूल सा नाजुक जानकर
खुश्बू मांगता है या छीन लेता है
और कोई हर लड़के को पठार दिल समझता है
और गाली बक जाता है ,ये तो झेल जायेगा
मैं दलित सा महसूस करता हु जब कोई एक से प्यार करता है
इजहारे तादाद में सौ कसमे वादे करता है
और एक दूसरे को ही अपना संसार मान लेता है
मैंने भी किया है एक से प्यार
उसने सबसे प्यार करना सिखाया है
और तब मैं दलित सा महसूस करता हु जब दो जोड़ो को हजारो के बीच
एक दूसरे में ही गुम देखता हु
#वसुधैवकुटुम्बकम