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मंगलवार, 12 मार्च 2019

"हम" से "मै" तक

हर इंसान अपने आप में एक दस्खत है |
उसकी गलती पे हमने सजा देकर उसको बरकरार बना दिया |
उसकी जिन्दगी की जरूरत दिखी,
उसकी गंदगी संसार को गैरत लगी,
साहब ने सजा सुना दिया,
कलम ने अपना गुरुर खो दिया,
जज साहब के दर्द को हमने रिवाज बना दिया,
हमने "हम" को ना जाने कब "मैं" बना दिया |

नृत्य को कसरत बना दिया,
गीत को बत्तमीज बना दिया,
इश्क़ के नाम पे बीमार को आबाद बना दिया,
उसके नाम की कसमें लेकर ममता को बदनाम कर दिया | 
चीखते चिल्लाते माइकवालो ने हमे जंग सीखा दिया,
किस्म हमारा एक है और किस्से हजारों बना दिया,
देश को 'लोगो" से नहीं 'जायदाद" से परिभाषित कर दिया |
अहम् लेकर चलने वाले राहत-चाहत सिर्फ लब्जों पे रख दिया,
क्योंकि "मैं" के आगे कुछ सोचा नहीं,
"हम" शब्द कभी सुना नहीं,
"मैं" बनकर "हम" को खोजते खोजते जिंदगी मिटा दिया |
हमने "हम" को ना जाने कब "मैं" बना दिया ||



शनिवार, 30 दिसंबर 2017

indian movies 2017



फिल्मे मनोरंजन के अलावा और मार्गदर्शन के अलावा बहुत जगहों पे हमे लिक से हट कर सोचने पे मजबूर कर देती है |
मै कुछ 2017 की इंडियन movie की लिस्ट दूंगा जो अगर आप नहीं देखे है तो 2018 में देखने की कोशिश कीजियेगा |
1- subh mangal savdhan - इस फिल्म को उन्हें देखने चाहिए जो अपनी मर्दानगी को लेकर चिंतित रहते है | और उन्हें भी जो अपनी मर्दानगी अपने पैंट में खोजते है |
2-qarib qarib single - इस फिल्म के लिए यही कहूंगा की इरफ़ान खान को पसंद करते है तो जरूर देखे |
3-tumhari sulu- इस फिल्म को उन्हें देखना चाहिए जो सोचते है की उनके अंदर टैलंट है लेकिन सरकार उन्हें सही प्लेटफार्म नहीं दे पा रही है या फिर जो अपने टैलेंट को छिपाने में अपनी भलाई सोचते है |
4-A death in the gunj - कोकना सेन शर्मा की ये फिल्म आज के समाज को जोरदार तमाचा मार रही है | ये इसलिए भी काबिले तारीफ क्योकि ये उनकी भी धजिय्या उड़ा रही है जो अपनी मर्दानगी दारु की बोतल और स्टाइलिश बाइक चलाने में देखते है |
5 - mukti bhawan - ये फिल्म भी एक शानदार अभिनय को प्रमाणित कर रही है | साथ में अगर आप एक short फिल्म varansni mumbai express देख लेंगे तो मज़ा आ जायेगा |
6 - trapped - ये फिल्म ये दिखाती है की राज कुमार राव आज के समय एक सुपरस्टार से काम नहीं है |
7 - बरेली की बर्फी - ये फिल्म भी बस राज कुमार राव की शानदार अभिनय की गवाह है | एक खूबसूरत प्यार की कहानी भी |
8 - शादी में जरूर आना - बस बोलो हैट्स ऑफ तो यू राज कुमार राव |
9 - newton - इसके बारे में क्या कहना ये तो ऑस्कर के लिए भेजा जा रहा है |
10 - omerta - इस फिल्म को देखा तो नहीं हु लेकिन राजकुमार राव की सबसे धाकड़ फिल्मो में से एक है ऐसा सुना है |
11 - vikram vedha - साउथ और तमिल की फिल्म तो बहुतो की पसंद है बस बताते नहीं है छुप छुप कर देखते है | तो भाईजान ये एक ऐसी फिल्म है जिसमे रजनीकांत की भगवान से भी बढ़कर एक्शन और स्टाइल मरने का तरीका तो नहीं है लेकिन एक्शन थ्रिलर और सस्पेंस से भरपूर फिल्म है |इस फिल्म को देखने के लिए आपको छुपने की जरुरत नहीं बल्कि एलान कर
के देखिये क्योकि विजय सेतुपति और माधवन की एक्टिंग तगड़ी है और स्क्रिप्ट भी |
12- arujn reddy - साउथ की ये भी फिल्म देखे |
13 - mersal - साउथ की ये भी फिल्म देखे |
14 - तू ही मेरा संडे , CRD ,TURUP ,GURGAON ,RIBBON ,THE GREAT FATHER ये सब फिल्म भी अच्छी है | ( मैंने ये फिल्म अभी देखा नहीं है ) |
15 - jagga jasoos - अगर आप राज कपूर के फैन है तो बस वही छाप उनके ही नाती में है | खतरनाक अभिनय रणवीर कपूर द्वारा |
16 - hindi medium - इरफ़ान खान की अभिनय वाली ये फिल्म एजुकेशन सिस्टम पे जोरदार तमाचा मार रही है |
17 -सीक्रेट सुपरस्टार - उभरता सितारा जायरा की काबिलेतारीफ फिल्म | इमोशन और मोटिवेशन से भरपूर |
18 - शेफ - सैफ अली खान की मस्त फिल्म |
19 - लखनऊ सेंट्रल - फरहान अख्तर की फिर से गजब की फिल्म |
20 - ittefaq - मेरे फेवरेट में से एक अक्षय खन्ना की फिल्म | सस्पेंस से भरपूर |

thanks 2017 for these movies.

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

रहमान



हमेशा की तरह ठण्ड की मार दिल्ली झेल रही थी | नए वर्ष का उल्लाश जोरो पे था | लोगो को बधाई देने की तवादते लगी हुई थी | और अनामिका बुफेट (रेस्टुरेंट) के पास लगभग 30 min से रहमान का इंतज़ार कर रही थी |

आज रहमान ने अपने बिजी दिनों में से और थकानो से उप्पर उठकर और बिना जाहिर किये अनामिका को बुफेट (रेस्टुरेंट ) के पास बुलाया था |

थोड़ी देर में रहमान बुफेट रेस्टुरेंट पंहुचा जो की साउथ दिल्ली के खास जगह पे था प्रेमियो का जमावड़ा लगा रहता था लेकिन उस भीड़ में भी बाकि दिल्ली से शांत और खिला हुआ जगह था वो |

रहमान उस जगह को खास वजह से चुना था | वहाँ किताबो की दुकाने थी ,सस्ती किताबे ,और कहानियो की किताबे और आर्ट गैलरी थी जो अनामिका को बहुत पसंद थी |

रहमान को पहुंचते देख अनामिका ने मुँह फेर लिया गुस्से में | उस गुस्से की खूबसूरती रहमान ने तो देखा था लेकिन वैसी अदा अनामिका का वो पहली बार देख रहा था |

वो मन मन ही सोचने लगा उसकी पसंद बिलकुल ठीक है |

वो अपना समय अनामिका को मनाने में बर्बाद नहीं करना चाहता था सो उसने उसकी ऊँगली पकड़ कर खींचते हुए फौवारो के बीच की जगह ले गया |

रहमान का भीड़ में इतनी हिम्मत और जगजाहिर वाली काया देख के अनामिका हैरान थी |

उसके आंखे अब अपनी उफान से भर चुकी थी | वो बस प्यार से किनारे से छलकने वाली थी |
अब लगभग वो समझ चुकी थी की आगे क्या होने वाला है |  तभी अचानक "जेहनासिब जेहनासिब ....तुझे चाहु बेतहासा जेहनासिब" गाना बजने लगा |
रहमान अनामिका को अजीब सी निगाहो से देख रहा था | बिना पलके झपके रहमान अनामिका के आँखों में ऐसे देख रहा था मानों वो दुनिया की सबसे खूबसूरत झील का अपने आँखों को दीदार करा रहा हो |
रहमान भी समय नहीं गवाना चाहता था | रहमान ने अनामिका को शादी के लिए आग्रह किया |
अनामिका ने खुशी से हामी भर दी |
रहमान और अनामिका की शादी 2  महीने बाद होना तय हुआ |
एक दिन रोड एक्सीडेंट में रहमान के मरने की खबर अनामिका को मिली | अनामिका बहुत रोई और नम आँखों से रहमान को विदाई दी |
2  महीने बीत गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी थी |

फिर अनामिका को मिला राहुल | राहुल और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन राहुल ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की राहुल अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
राहुल मान गया |
फिर एक दिन राहुल की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने राहुल को नम आँखों से विदा किया |
2 महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला गिरीश |
गिरीश और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन गिरीश  ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की गिरीश अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
गिरीश मान गया |
फिर एक दिन गिरीश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने गिरीश  को नम आँखों से विदा किया |
2  महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला अमिश |
अमिश और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन अमिश ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की अमिश अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
अमिश मान गया |
फिर एक दिन अमिश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने अमिश को नम आँखों से विदा किया |
2 महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला कार्तिक |
कार्तिक और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन कार्तिक ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई | २ महीने बाद दोनों ने शादी कर ली |
"कार्तिक वेड्स अनामिका" |
2 महीने हो गए शादी को अनामिका कार्तिक को भूल नहीं पायी |

कार्तिक जिन्दा है, रहमान जिन्दा है |









                                   (image source-"drawing of sketch"-anonymous' small website)

रविवार, 26 नवंबर 2017

न्यूटन अगर नूतन होता

न्यूटन अगर नूतन होता -



अभी एक सिनेमा बॉलीवुड इंडस्ट्री में रिलीज की गयी "न्यूटन" | इसके लेखक और डायरेक्टर अमित मसूरकर जी है और एक्टिंग में राज कुमार राव जी है जो की आज के यूथ की पसंद है और अपनी छवि बनाने के काबिल भी |
खैर अभी बताई गयी जानकारी को बस बताना जरूरी था, पढ़ना नहीं क्योकि हमे तो सिनेमा के थीम से ही मतलब है ,की "भाई कहना क्या चाहते हो" |
सो स्टोरी कुछ इस तरह है की न्यूटन नाम का एक आदमी जो की अभी अभी  गवर्नमेंट क्लर्क बने थे |वो एक दलित वर्ग से सम्बन्ध रखते थे (वैसे इस बात का सिनेमा से कोई लेना देना नहीं है ).वो एक चुनावी ड्यूटी के लिए छत्तीसगढ़ के नक्सली क्षेत्र में भेजे जाते है जो की बहुत ही एक संवेदलशील क्षेत्र है | उस जिले में पिछले चुनाव में नक्सलियों ने 19  लोगो को मार दिया था और जिस क्षेत्र में न्यूटन बाबू भेजे जा रहे थे वहा बहुत सालो बाद इस साल चुनावी कैंप लगा था | तो सोच सकते है वो कितना संवेदनशील इलाका होगा | वहा चुनाव होना था | वहा पे 76 लोगो की लिस्ट थी जो वोट डाल सकते थे सिर्फ 76  लोगो का नाम वोटिंग लिस्ट में था |.चुनावी अधिकारी न्यूटन बाबू और उनकी टीम के सुरक्षा की जिम्मेदारी आत्मा सिंह नाम के एक असिस्टेंट कमांडेंट और उनके साथियो की थी | आत्मा सिंह ने वहा की पूरी हालत न्यूटन बाबू को बता दी थी लेकिन एक बात न्यूटन बाबू में थी ,वो उनकी ईमानदारी या सही रूप में कहे तो ड्यूटी के प्रति वफादारी |
पहले तो आत्मा सिंह ने उन्हें बूथ लगाने से रोका बोले की यही कुछ गांव वालो को बुला के उनका वोट ले लेते है | इसमें सुरक्षा भी रहेगी लेकिन न्यूटन बाबू तो थे कायदे कानून को सख्ती से मानने वाले उन्होंने बड़े ही कठोरता के साथ मना कर दिया | न्यूटन बाबू और उनकी टीम को न्यूटन की जिद के कारण उन्हें बूथ तक ले जाया गया | बता दू की उनकी टीम में एक वही की रहने वाली सिखिका भी थी जो की आदिवासी थी और वहा के हालत के बारे में उन्हें 200  प्रतिसत पता था क्योकि वही वो पली बढ़ी जो थी | बाद में बूथ लगा और होने लगा वोट लेने का इंतज़ार पर कोई नहीं आया वोट देने | ये भी बता दू की नक्सली लोग गांव वालो को डरा कर रखते है की जो भी वोट देने जायेगा हम उससे मार देंगे |
बाद में न्यूटन बाबू को लगा की गांव में जा के लोगो को समझा बुझा कर लाया जाये (बिना जोर जबरजस्ती किये) | इसके लिए उन्होंने ने आत्मा सिंह और उनके फ़ोर्स की सहायता मांगी | आत्मा सिंह और उनके साथी अपने तरीके से कुछ गांव वालो को लाये जिनके पास वोटर कार्ड था | वोटिंग शुरू की गई लेकिन बेचारे आदिवासियों को पता नहीं कितने साल हो गए थे उन्हें वोट देने उन्हें नहीं पता था की अब वोट देने के लिए मशीन आ गई है EVM मशीन | तब न्यूटन बाबू ने उन कुछ जो 30 -35  वोटर थे उन्हें सिखाने की कोशिश किये की मशीन पे वोट कैसे देना है | लेकिन ये न सीखा पाए की किस नेता को वोट दे क्योकि उनमे से कोई भी उन उमीदवार नेता का नाम और शक्ल तक नहीं जानते थे | खैर वोटिंग शुरू हुई और वो सारे वोटर वोट देके चले गए | फिर से न्यूटन बाबू अब जाने को तैयार नहीं क्योकि उनकी ड्यूटी की टाइम अभी ख़तम नहीं हुआ था और उनको लग रहा था की यहाँ 1 वोट का भी बहुत बड़ा महत्व है | सो उनको लगा की शायद कोई वोट देने आये सो वो अपने बाकि टीम के साथ फिर से इंतज़ार करने लगे | वो थोड़ा बहुत ड्यूटीवादी भी थे की ऑन ड्यूटी नो बातचीत या नो मस्ती भले ही ड्यूटी के टाइम पर कोई काम ही न हो |
उनकी वजह से आत्मा सिंह और उनकी बटालियन भी थी क्योकि उनको उनकी सुरक्षा जो करनी थी .सबकी जान खतरे में थी | तो आत्मा सिंह ने अपने ही लोगो से फायरिंग करवा के न्यूटन बाबू और उनकी टीम को डराया की हमला हो गया है | अब हमे जल्दी से EVM को बचा के यहाँ से निकल लेना चाहिए | फिर सब लोग निकल लिए | बीच रास्ते में न्यूटन बाबू को समझ आ गया की धोखा हुआ है वो जंगल से वापस बूथ की ओर भागने लगे ताकि वो अपनी ड्यूटी निभा सके | अब सब फ़ोर्स वाले भी उन पीछे भागने लगे की कही उनको कुछ हो गया तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी | फिर उन्हें पकड़ते है |
ड्यूटी का टाइम इन सब में ख़तम हो जाता है और न्यूटन बाबू की ड्यूटी भी ख़त्म हो जाती है और सिनेमा भी ख़त्म हो जाता है |
आप सब समझ ही गए होने की सिनेमा में न्यूटन को एक ईंमानदार आदमी ,काम के प्रति वफादार और सिनेमा के माध्यम से ये भी कहने की कोशिश किया गया है की वोटिंग कितनी जरुरी है और हर एक वोट बहुत मायने रखता है |
अब आते है असली कहानी पर
अगर न्यूटन नूतन होता तो -
जी न्यूटन ने जितना भी काम किया वो एक बेफ़कूफी है और ईमानदारी का घमंड दिखता है |
उन्हें इस बात का घमड़ है की वो ईमानदार है ,जबकि यही तो उनका काम है |
अब नूतन के हिसाब से काम करते है |
नूतन को चुनावी क्षेत्र में पहुंचाया जाता है वहा उनका मिलन आत्मा सिंह से होता है जो वहा की सारी कंडीशन बताते है |
तो नूतन को लगा की  वहा के माहौल को ध्यान रखना चाहिए ताकि जो ये पुलिस फ़ोर्स के लोग और उनके साथ लोग है उनकी जान खतरे में न पड़े |
अगर इसके लिए झूट भी बोलना पड़े या अपनी ड्यूटी से गद्दारी करना पड़े तो वही ठीक है .वैसे असल मायने में वही सही का ड्यूटी के प्रति वफादारी है |
नूतन ने वही वोटिंग करा दिया और वही कुछ 10 -15  लोगो को लाया गया और उनका वोट ले लिया गया |
फिर नूतन अपनी टीम के साथ सही सलामत वापस चला गया और पुलिस फ़ोर्स भी सही सलामत रही |
 इस बार के चुनाव में कोई नहीं मारा गया |
क्योकि चुनाव नूतन के सूझ बुझ से हुई थी |
आप वहा वोटिंग करने जा रहे है जहा के लोगो को यही नहीं पता की उनका प्रत्याशी कौन है | ये जान लीजिये की वहा वोट की कोई वैल्यू नहीं है |
जहा के लोगो को 2 वक्त की रोटी नसीब नहीं होती वहा जाके आप उन्हें वोटिंग का मतलब समझा रहे है और फायदे गीना रहे है |
अरे जिस क्षेत्र में लोग आ - जा नहीं सकते उस क्षेत्र का विकास कैसे होगा | ऊप्पर से वहा 15 लोग उमीदवार के रूप में खड़े बस इसलिए की अगर 5  वोट भी उन पर पड़ जाये तो वो वहाँ के राजा बन जाये और खूब लुटे सरकारी पैसो को |
अगर न्यूटन बाबू की जिद के कारण एक भी चुनावी अधिकारी या पुलिस फ़ोर्स मर जाता तो कल न्यूज़ वाले और सारे बड़े लोग उसे शहीद बताते जबकि ये एक मर्डर है नक्सलियों द्वारा और न्यूटन की जिद और गलत फैसले के द्वारा |
कौन कहता है वोटिंग एक बहुत बड़ा त्यौहार है | अरे है मैं भी मानता हु की लोकतंत्र में वोटिंग ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए लेकिन छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके और बहुत सारे इलाके जो गंभीर रूप से नक्सलियों के कब्जे में है या नक्सलियों से पीड़ित है वहा पहले लोगो को रहने का घर और 2 टाइम की रोटी नसीब तो हो ताकि वहा से भी कोई मालको जैसा बने |
 जी हां यहाँ हीरो न्यूटन नहीं मालको है जो वहा के आदिवासियों किए बीच रहकर एक तरफ से नक्सलियों से और दुरी तरफ से सरकारी अफसरों से प्रताड़ित होने के साथ साथ वहा के बच्चो को शिक्षा देने का काम करती है | वो एक शिक्षिका है वहाँ की | उसने अपने भले और दूसरे के भले के लिए नक्सलियों और सरकारी अफसरों की बात में हां में हां मिला के काम चला रही है और साथ साथ बच्चो को शिक्षा भी दे रही है है |
जैसे की कहानी है उस हिसाब से देखा जाये तो वहा के 76  में से 76  को वोट ले लो या किसी का भी वोट मत लो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है | क्योकि वहा के हिसाब से वोटिंग से ज्यादा जरूरत वहा के लोगो को आलिंगन की जरुरत है ताकि वो टूटे न ! अरे वही नहीं रहेंगे तो वहा के उमीदवार के होने न होने से  क्या फर्क पड़ता है |
तो नूतन ने अपना काम सुरक्षा पूर्व करते हुए आत्मा सिंह जी को जय हिन्द कहते हुए वापस चले जाते है | सुरक्षित रूप से |
और वहा के हालत के बारे में सरकार को एक चिठ्ठी लिखते है कुछ परामर्श के साथ ताकि उन  आदिवासियों को रोटी ,कपडा ,मकान नहीं दे सकते तो कम से कम उन्हें आजादी से तो रहने दो ,वो सब तो इन सब कमियों के साथ ही साथ एक डर में जी रहे है |
और मालको को कुछ फण्ड देने की भी गुहार लगाई ताकि वो खुद से साथ बच्चो को भी और अच्छी शिक्षा दे सके | मालको नूतन के लिए उतनी ही महान है जितनी मलाला यूसुफजई ,जितनी साइना नेहवाल,जितनी सानिया मिर्ज़ा,जितनी मिथली राज,जितनी मानसी छिल्लर |
और ये भी गुहार लगाई की ये सारे काम बिना पब्लिसिटी किये और बिना न्यूज़ में फैलाये करे ताकि मालको की सहायता भी हो जाये ,बच्चो की भी सहायता हो जाये और मालको को जान का खतरा भी न हो | क्योकि नक्सली लोग सरकार से नफ़रत करते है और अगर उन्हें पता चला की सरकार ने मालको को कोई सहयता दी है या किसी चीज से सम्मानित किये है तो मालको को मार देते और फिर मालको , मालको नहीं रह पायेगी |




                                                 (image source-google)

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

कही तो मैं गलत था

     कही तो मैं गलत था
     हर रोज घंटो पहले उस मोड़ पे आ के तेरा इंतज़ार करता
     बेवजह
     हर रोज वही तेरी गुस्सा को प्यार समझता
     करता फिर भी सबके सामने अपनी रुस्वाई
     कही तो मैं गलत था
     तेरी हर क्रोध पे मैं शोध करता
    तुझे उल्लाश के लिए कुछ उपहास सहता
    तेरी हर ख्वाइश को समझा अपना मकसद
    कही तो मैं गलत था
    वो फूलो की थाली तुझे पकड़ाना (बाकि लड़कियों से बचा के )
    तेरे आने के इंतज़ार में वो देर से प्राथनाए
    वो सारी मेरी सजावटें
    वो सारी मेरी सवारते
    वो सारी मेरी चुपिया
    वो सारी मेरी कहावते
    वो सारी मेरी बनावटी कहानिया
    कही तो मैं गलत था
   तुम जानती की मैं तुमको चाहता
   तुम जानती की मैं तुमको मानता
   तुम जानती की मैं तुम हंसाता
   तुम जानती की मैं दुलारता
   कही तो मैं गलत था
   वो शर्म के मारे कोने में मेरा छुपना
   एक बंद आँखों से तुम्हे देखना
   तुमको अपने सामने होने खुद को रखना
   मिलने से पहले दस बार खुद को धुलना
   तुम्हारी हांथो पे लड़िया पड़ने से बचाना
   कही तो मैं गलत था
   वो तुम्हे रोते देख इशारो में दुसरो से पूछना
   खुश करने के लिए बेवजह गिर जाना
   खुद से ही बाते कर तुमसे जवाब मांगना
   कही तो मैं गलत था
   उन् छडियो को तोड़ देना जो तुमपे पड़ती
  उसके लिए दूर तक जाना
  फिर हँसते हुए आना
  हर काम को एक सार्थ मानना
  कही तो मैं गलत था
 आज उसी गलती की सजा से दे रही हो मुझे
 मेरी बेबसी के कारण दूर जा रही हो मुझसे
 मेरे सारे सपनो को तोड़े जा रही हो
 मेरे से बात करके किसी और से उलझ रही हो
 तुम किसी और की होने जा रही हो
 क्योकि मैं नादान था
 और यही थी मेरी गलती ?
 वो सितारों की दुनिया भी बनाऊंगा
 वो नजरे झुका के उस टावर के निचे उस कीमती को बेस्किमती उंगलियों में सजाऊंगा
 पल पल तुममे ही जीने की हर कोशिश करूँगा
 हर नाव पे एक गद्दी रख को उसे आसमानो की सैर करूँगा
 हर आंसू को उन्ही पलकों पे सजा दूंगा
 हर ख्वाइश पे ख्वाइश की मांग रक्खूँगा
 बस एक बार
 एक बार
 मुझे आवाज तो दो
 देखो तो सही
 आज भी बचा हु कुछ
 उसी मस्तियो के साथ
 टुटा हु कुछ कारणो से बिखरा नहीं
 समेटो तो सही
 हाथ न सही साथ तो दो
 हाथ मैं खुद थाम लूंगा
 एक बार पलट कर आवाज तो दो
क्योकि बहुत कुछ तो मैं सही भी था