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मंगलवार, 12 मार्च 2019

"हम" से "मै" तक

हर इंसान अपने आप में एक दस्खत है |
उसकी गलती पे हमने सजा देकर उसको बरकरार बना दिया |
उसकी जिन्दगी की जरूरत दिखी,
उसकी गंदगी संसार को गैरत लगी,
साहब ने सजा सुना दिया,
कलम ने अपना गुरुर खो दिया,
जज साहब के दर्द को हमने रिवाज बना दिया,
हमने "हम" को ना जाने कब "मैं" बना दिया |

नृत्य को कसरत बना दिया,
गीत को बत्तमीज बना दिया,
इश्क़ के नाम पे बीमार को आबाद बना दिया,
उसके नाम की कसमें लेकर ममता को बदनाम कर दिया | 
चीखते चिल्लाते माइकवालो ने हमे जंग सीखा दिया,
किस्म हमारा एक है और किस्से हजारों बना दिया,
देश को 'लोगो" से नहीं 'जायदाद" से परिभाषित कर दिया |
अहम् लेकर चलने वाले राहत-चाहत सिर्फ लब्जों पे रख दिया,
क्योंकि "मैं" के आगे कुछ सोचा नहीं,
"हम" शब्द कभी सुना नहीं,
"मैं" बनकर "हम" को खोजते खोजते जिंदगी मिटा दिया |
हमने "हम" को ना जाने कब "मैं" बना दिया ||



शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

इंटरव्यू

सारे इंटरव्यू में सबसे पहला प्रश्न यही होता है की अपने बारे में कुछ बताओ...(Please try to feel it in English......TELL ME ABOUT YOURSELF )

समझ नहीं आता मेरी आवाज और मुझे ऊप्पर से नीचे तक देख कर आँखों में असहमति लेते हुए वो मेरी आवाज सुनना ही क्यों चाहता है | मुझे पता है की मेरी आवाज न तो लता जी जैसी है, न ही रफ़ी जी जैसी फिर भी उसकी आंखे मेरी आवाज को और बेसुरी बना देती है |

मेरे जवाब लिखित में ऐसा है ....

काश मैं ही सरकार होता ,
काश मैं ही आगाज होता
मेरे भी चेहरे बेदाग होते
और मैं ही राजकुमार होता
मेरे बाल भी लम्बे और सुनहरे होते
मैं भी आकाश की तरह ऊंचा होता
मेरे हाथ में एक त्रिशूल होता
और मैं ही शिव होता
काश मैं अंदर से जवान होता
और काश की मेरी आवाज में इतना डर न होता
काश की मेरे जूतों की आहटे तेरे हॉल में गूँजती
और तू एक बार मेरी तरफ भी देखता
काश मेरे लब सूखे न होते
मैं पालकी में बैठ के आया होता
पर दुबके समाज में पला
थोड़ा प्यार और गालियों के बीच बढ़ा
अच्छे काम पे ईर्ष्या भरी समाज संग चला
मैं सिर्फ एक लड़का हूँ |


रविवार, 25 नवंबर 2018

माटी

माटी माटी 
मैं भी माटी , तू भी माटी 
है रंग रूप की कीमत माटी 
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी 
किस भाव की है तेरी माटी ?
हर हथियार और हर पहलवान है माटी
हर गरीब , हर अमीर है माटी
हर रक्षक और हर भक्षक माटी
है मंत्री और संत्री भी माटी
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी
किस भाव की है तेरी माटी ?
जो खाया सोया वो भी माटी
जो जगा और पाया वो भी माटी
जो बनाया और चमकाया वो भी माटी
जो निखरा जो पहना वो भी माटी
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी
किस भाव की है तेरी माटी ?
कृष्ण बना तेरी माटी
या कंस बना तेरी माटी ?
धैर्यशक्ति की नीव पर मानवता का आधार है तेरी माटी ?
या लुटेरा शासनकर्ता सा दिखावटी एहसान बनी तेरी माटी ?
दलित भी माटी क्षत्रिय भी माटी
धर्म के काजी और ध्वज के काजी
सब है माटी
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी
किस भाव की है तेरी माटी ?
आश्रय बना है तेरी माटी ?
या निर्लज अनंत लक्ष्य बना है तेरी माटी ?
कल्पना बना हुआ आलसी है तेरी माटी ?
या खुसबू बिखेरता हुआ हँसता है तेरी माटी ?
अर्थ अनर्थ की होड़ में लगा है तेरी माटी ?
या अक्ल और अवसर के साथ रौशनी भी खोजता है तेरी माटी ?
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी
किस भाव की है तेरी माटी ?
जिन्दा माटी से इश्क़ करता है तेरी माटी ?
या ख्याति खातिर धनवान मुर्ख है तेरी माटी 
उचित अनुचित की पहचान तो कर
शासन छोड़ कर लोगो से प्यार तो कर
जाने कब हो जाये तेरी माटी , माटी माटी ?
बस ढूंढ जरा तू अपनी माटी
किस भाव की है तेरी माटी ? 

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

रहमान



हमेशा की तरह ठण्ड की मार दिल्ली झेल रही थी | नए वर्ष का उल्लाश जोरो पे था | लोगो को बधाई देने की तवादते लगी हुई थी | और अनामिका बुफेट (रेस्टुरेंट) के पास लगभग 30 min से रहमान का इंतज़ार कर रही थी |

आज रहमान ने अपने बिजी दिनों में से और थकानो से उप्पर उठकर और बिना जाहिर किये अनामिका को बुफेट (रेस्टुरेंट ) के पास बुलाया था |

थोड़ी देर में रहमान बुफेट रेस्टुरेंट पंहुचा जो की साउथ दिल्ली के खास जगह पे था प्रेमियो का जमावड़ा लगा रहता था लेकिन उस भीड़ में भी बाकि दिल्ली से शांत और खिला हुआ जगह था वो |

रहमान उस जगह को खास वजह से चुना था | वहाँ किताबो की दुकाने थी ,सस्ती किताबे ,और कहानियो की किताबे और आर्ट गैलरी थी जो अनामिका को बहुत पसंद थी |

रहमान को पहुंचते देख अनामिका ने मुँह फेर लिया गुस्से में | उस गुस्से की खूबसूरती रहमान ने तो देखा था लेकिन वैसी अदा अनामिका का वो पहली बार देख रहा था |

वो मन मन ही सोचने लगा उसकी पसंद बिलकुल ठीक है |

वो अपना समय अनामिका को मनाने में बर्बाद नहीं करना चाहता था सो उसने उसकी ऊँगली पकड़ कर खींचते हुए फौवारो के बीच की जगह ले गया |

रहमान का भीड़ में इतनी हिम्मत और जगजाहिर वाली काया देख के अनामिका हैरान थी |

उसके आंखे अब अपनी उफान से भर चुकी थी | वो बस प्यार से किनारे से छलकने वाली थी |
अब लगभग वो समझ चुकी थी की आगे क्या होने वाला है |  तभी अचानक "जेहनासिब जेहनासिब ....तुझे चाहु बेतहासा जेहनासिब" गाना बजने लगा |
रहमान अनामिका को अजीब सी निगाहो से देख रहा था | बिना पलके झपके रहमान अनामिका के आँखों में ऐसे देख रहा था मानों वो दुनिया की सबसे खूबसूरत झील का अपने आँखों को दीदार करा रहा हो |
रहमान भी समय नहीं गवाना चाहता था | रहमान ने अनामिका को शादी के लिए आग्रह किया |
अनामिका ने खुशी से हामी भर दी |
रहमान और अनामिका की शादी 2  महीने बाद होना तय हुआ |
एक दिन रोड एक्सीडेंट में रहमान के मरने की खबर अनामिका को मिली | अनामिका बहुत रोई और नम आँखों से रहमान को विदाई दी |
2  महीने बीत गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी थी |

फिर अनामिका को मिला राहुल | राहुल और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन राहुल ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की राहुल अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
राहुल मान गया |
फिर एक दिन राहुल की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने राहुल को नम आँखों से विदा किया |
2 महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला गिरीश |
गिरीश और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन गिरीश  ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की गिरीश अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
गिरीश मान गया |
फिर एक दिन गिरीश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने गिरीश  को नम आँखों से विदा किया |
2  महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला अमिश |
अमिश और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन अमिश ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई लेकिन एक शर्त पे की अमिश अपना नाम रहमान कर लेगा , शादी के बाद |
अमिश मान गया |
फिर एक दिन अमिश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी |
अनामिका को ये खबर मिली वो बहुत रोई | अनामिका ने अमिश को नम आँखों से विदा किया |
2 महीने हो गए अनामिका रहमान को भूल नहीं पायी |

फिर अनामिका को मिला कार्तिक |
कार्तिक और अनामिका के बीच नजदीकियाँ आती गयी | एक दिन कार्तिक ने अनामिका को शादी के लिए प्रोपोज़ किया |
अनामिका मान गई | २ महीने बाद दोनों ने शादी कर ली |
"कार्तिक वेड्स अनामिका" |
2 महीने हो गए शादी को अनामिका कार्तिक को भूल नहीं पायी |

कार्तिक जिन्दा है, रहमान जिन्दा है |









                                   (image source-"drawing of sketch"-anonymous' small website)