गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

प्रेम क्या है


प्रेम प्रबल अहम् का ही एक सुचारु रूप है 

अहम कुरूप है तो प्रेम सुरूप है 

प्रेम आप किसी और नहीं कर ही नहीं सकते 

ये एक आत्मीय भावना है 

जिसकी खोज में इंसान दर दर भटकता है 

वो प्रेम उसके अंदर ही निहित होता है 

प्रेम धैर्य है 

प्रेम शौर्य है 

प्रेम यथार्थ है 

प्रेम निर्भीक है 

प्रेम बिशुद्ध है 

प्रेम सौम्य है 

प्रेम प्रकाश है 

पर कैसे ?

धैर्यवान बनो हर प्ररिस्थि के लिए 

डरने का कोई कारण है ही नहीं 

सच से डटो और सच बोलों यही यथार्थ है 

जहा लोग बेवजह झुकते और टूटते है वहा निर्भीक रहो 

चाहे वो रण की भूमि हो या प्रेमिका का साया 

कोई छल कपट करने का इस समाज में कोई वजह ही नहीं है तो बिशुद्ध रहो 

शांत और निर्मल रहो , दया और करुणा दिल में हमेशा वास्तविक हो 

ये सब तुम्हे आकर्षक बनाएंगे और तुम चमकोगे प्रकाश की तरह 

यही प्रेम है 

बस यही || 

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