प्रेम प्रबल अहम् का ही एक सुचारु रूप है
अहम कुरूप है तो प्रेम सुरूप है
प्रेम आप किसी और नहीं कर ही नहीं सकते
ये एक आत्मीय भावना है
जिसकी खोज में इंसान दर दर भटकता है
वो प्रेम उसके अंदर ही निहित होता है
प्रेम धैर्य है
प्रेम शौर्य है
प्रेम यथार्थ है
प्रेम निर्भीक है
प्रेम बिशुद्ध है
प्रेम सौम्य है
प्रेम प्रकाश है
पर कैसे ?
धैर्यवान बनो हर प्ररिस्थि के लिए
डरने का कोई कारण है ही नहीं
सच से डटो और सच बोलों यही यथार्थ है
जहा लोग बेवजह झुकते और टूटते है वहा निर्भीक रहो
चाहे वो रण की भूमि हो या प्रेमिका का साया
कोई छल कपट करने का इस समाज में कोई वजह ही नहीं है तो बिशुद्ध रहो
शांत और निर्मल रहो , दया और करुणा दिल में हमेशा वास्तविक हो
ये सब तुम्हे आकर्षक बनाएंगे और तुम चमकोगे प्रकाश की तरह
यही प्रेम है
बस यही ||
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