गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

प्रेम क्या है


प्रेम प्रबल अहम् का ही एक सुचारु रूप है 

अहम कुरूप है तो प्रेम सुरूप है 

प्रेम आप किसी और नहीं कर ही नहीं सकते 

ये एक आत्मीय भावना है 

जिसकी खोज में इंसान दर दर भटकता है 

वो प्रेम उसके अंदर ही निहित होता है 

प्रेम धैर्य है 

प्रेम शौर्य है 

प्रेम यथार्थ है 

प्रेम निर्भीक है 

प्रेम बिशुद्ध है 

प्रेम सौम्य है 

प्रेम प्रकाश है 

पर कैसे ?

धैर्यवान बनो हर प्ररिस्थि के लिए 

डरने का कोई कारण है ही नहीं 

सच से डटो और सच बोलों यही यथार्थ है 

जहा लोग बेवजह झुकते और टूटते है वहा निर्भीक रहो 

चाहे वो रण की भूमि हो या प्रेमिका का साया 

कोई छल कपट करने का इस समाज में कोई वजह ही नहीं है तो बिशुद्ध रहो 

शांत और निर्मल रहो , दया और करुणा दिल में हमेशा वास्तविक हो 

ये सब तुम्हे आकर्षक बनाएंगे और तुम चमकोगे प्रकाश की तरह 

यही प्रेम है 

बस यही || 

मनुष्य का प्रेम

मैने तुम्हें प्रेम किया
पर अंधा होकर नहीं।
मेरी चेतना जाग रही थी,
मेरी बुद्धि देख रही थी,
मेरी इंद्रियाँ निर्णय ले रही थीं।
पहले मैंने तुम्हारा रूप देखा,
त्वचा का रंग,
देह की रेखाएँ,
आँखों की गहराई,
ज़ुल्फ़ों की लय।
फिर तुम्हारी आवाज़ सुनी,
तुम्हारे साथ बैठा,
तुम्हारी उपस्थिति को अपने भीतर तौला।
जो अनुकूल लगा,
उसे मैंने स्वीकार किया।
और उस स्वीकृति को
प्रेम नाम दे दिया।
तुम्हारा इंकार आया,
पर वह मेरे प्रेम को रोक न सका।
क्योंकि मेरा प्रेम
भावना से अधिक
निर्णय था।
धीरे-धीरे
तुम्हें सोचने की आदत पड़ी,
तुम्हारे होने की आदत,
तुम्हारे बिना भी तुम्हें चाहने की आदत।
अब यह प्रेम कम,
एक स्थापित आदत अधिक है।
तुम चली जाओ,
लौट आओ,
या मेरी ज़िंदगी में कोई और आए ,
यह आदत कुछ समय तक जीवित रहेगी।
क्योंकि मनुष्य का प्रेम
दिव्य नहीं होता,
वह सचेतन होता है।
वह रूप देखता है,
अनुकूलता खोजता है,
स्वर, स्पर्श, व्यवहार ,
सबको परखता है।
मैं सहानुभूति दे सकता हूँ
उनके लिए जो मुझे आकर्षित नहीं करते,
मदद कर सकता हूँ,
दयालु रह सकता हूँ ,
पर प्रेम नहीं कर सकता।
प्रेम वहाँ जन्म लेता है
जहाँ मेरी चेतना सहमत होती है।
और समय के साथ
वही चेतन चयन
आदत बन जाता है।
हम उसे पवित्र कहते हैं,
शाश्वत कहते हैं,
भाग्य कहते हैं ,
पर सच यह है
कि मनुष्य का प्रेम
निर्णय से जन्मता है
और आदत से टिकता है।
बिना चेतना,
बिना बुद्धि के
प्रेम करना
मनुष्य के बस में नहीं।

अगर अब सवाल ये है की प्रेम कैसे करे और ये प्रेम है क्या ? - Continue....